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2300 साल पुराना अवंति पार्श्वनाथ देश का ऐसा पहला जैन मंदिर बना, जहां कल्याण स्त्रोत की 44 गाथा लिखी
उज्जैन :- दानीगेट पर 2300 साल पुराना अवंति पार्श्वनाथ मंदिर देश का ऐसा पहला जैन मंदिर होगा, जहां कल्याण स्त्रोत की 44 गाथा देहरियाें पर लिखी गई हो। यह मंदिर पहले से ही देश के 108 पार्श्वनाथ मंदिरों में शामिल होने के कारण प्रसिद्ध है। 9 साल में 10 करोड़ रुपए के खर्च से अब जाकर जीर्णोद्धार पूरा हुआ है। आचार्य मणिप्रभ सागर महाराज इसके प्रणेता हैं। आचार्य के सान्निध्य में ही देशभर के जैन समाज के दानदाताओं के सहयोग से 2008 में मंदिर निर्माण शुरू हुआ था। सफेद मार्बल से बने मंदिर का निर्माण राजस्थान मकराना के 100 कारीगरों ने किया है। 100 फीट चौड़े, 200 फीट लंबे मंदिर की वर्ष 2018 में प्रतिष्ठा व शुभारंभ की तैयारियां चल रही हैं। 6 साल बाद आचार्यश्री पैदल विहार करते हुए 30 मई को इसकी रूपरेखा बनाने उज्जैन आ रहे हैं। मंदिर जीर्णोद्धार समिति के अध्यक्ष पुखराज चौपड़ा, ट्रस्ट अध्यक्ष हीराचंद्र छाजेड़ ने बताया आचार्य समाजजनों के साथ कार्यक्रम को लेकर चर्चा करेंगे तथा अगले दिन चातुर्मास हेतु बीकानेर के लिए रवाना होंगे। आज भी ट्रस्ट के पास विक्रम संवत 266 से यह मंदिर उज्जैन में स्थित होने का रिकॉर्ड उपलब्ध है।
जानें क्या है कल्याण स्त्रोत की 44 गाथा
अवंति पार्श्वनाथ में कल्याण स्त्रोत मंदिर बनाकर 44 गाथाओं को 44 देहरियाें पर लिखा है। ट्रस्टी चंद्रशेखर डागा, निर्मल सखलेचा के अनुसार इसी मंदिर में ऐसा इसलिए किया क्योंकि आचार्य सिद्धसेन दिवाकर ने इस स्थान पर कल्याण स्त्रोत की रचना की थी और 11वीं गाथा की रचना के समय भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा प्रगट हुई।